Saturday, 30 March 2013

सपना नहीं हकीकत थी...

           
रेप एक भयावह हकीकत होती है किसी लड़की के  लिए
जिसे वो भूले न भूल सकती है.बस हर लम्हा वो घिनौनी याद उसे झंकझोरती रहती है .
आइये मैं आपको एक ऐसी लड़की की दास्तां से वाकिफ़ कराता हूँ जो दुष्कर्म जैसे घोर पाप कृत्य  का शिकार हुई ...


सपना नहीं हकीकत में वो बात थी,
सन्नाटे में गूंजती गिडगिडाती मेरी एक आवाज़ थी,
रहगुज़र इस सफ़र में घिनौने मंजर की बरसात थी,
कटी सी इस जिंदगी में न किसी आहट की अब आस थी,
सपना नहीं हकीकत में वो बात थी............

उस रात वो आँखें मदहोशी में डूबी थी,
 न जाने क्यों रुसवाई किस्मत की मुझ पर ही आकर टूटी थी,
अरमानों की खुली जमीन अब सिमटने लगी थी ,
तन्हाइयों से दोस्ती गहरी नज़र आती थी,
बिखरी न थी मैं अभी हिम्मत कुछ बाकी थी,
न्याय मिलेगा इस उम्मीद में कम्बख्त साँसें न जाती थी
पर आज वो भी खो गयी रोशनी की आस लिए अंधेर दरिया में अब सो गयी.

आखिर में यही कहूँगी सपना नहीं हकीकत में वो बात थी
सन्नाटे में गूंजती गिडगिडाती मेरी एक आवाज़ थी...........

4 comments:

  1. बेहद मर्मस्पर्शी रचना.

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  2. मर्मस्पर्शी रचना.
    सच में ऐसी रचनाएं कभी कभी ही ब्लाग पर मिलती हैं।
    बहुत सुंदर भाव और प्रस्तुति

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