Saturday, 15 June 2013

आज तलक...

आयना को चौराहे पर बच्चों की मदद करते देख तनय बड़ा हैरान था.वक़्त की दीवारों पर पड़े  सुराखों से यादें फिर झाँकने लगी.कुछ पलों बाद यादों की धुंध से बाहर निकलते ही उसने आयना को आवाज़ दी,पर आज भी वो समय की साजिश का शिकार हुआ और नम आँखें लिए फिर से आगे बढ गया.
                      
               धर्मविरुद्ध विवाह करने के कारण कुछ धर्मावलम्बियों की रंजिश का शिकार आयना को होना पड़ा था.विवाह के कुछ समय बाद ही उसके शरीर से सांसें छिन ली गयी.पर तनय आज भी  उस एक चेहरे को हर लम्हे में तलाशता फिरता है.शायद सब कुछ बिखर गया पर वो एक तस्वीर अब भी ख्यालों में कहीं सिमटी है. 
                          
            बस एक ही प्रश्न उसे आज तलक जिन्दा रखे है "क्यों प्यार धर्म का शिकार होता है?प्यार तो दो रूहों का मिलन है,फिर ये धर्म रूपी दीवार क्यों खड़ी हो जाती है?"    

9 comments:

  1. लघुकथा अपना प्रभाव छोडती है ...
    भाषा पर भी आपकी अच्छी पकड़ है ...!!

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  2. वाकई प्यार में धर्म का क्या काम
    सार्थक बात कही
    बेहतरीन
    बधाई

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  3. हमारी ही बनाई हुई दीवार जो है ... अब हम इससे प्रेम जो करने लगे हैं इंसानियत को छोड़ के ...

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  4. बात तो सार्थक कही है आपने

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  5. एक ऐसा प्रश्न जिसका जवाब ...शायद किसी के पास नहीं.....

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  6. वाह...सुन्दर भावपूर्ण लघुकथा...बहुत बहुत बधाई...

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  7. वाह.सुन्दर प्रभावशाली ,भावपूर्ण लघुकथा.बहुत बहुत बधाई...

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  8. वाह- मन को छूती मार्मिक लघु कथा
    बहुत खूब --------

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